
*स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि पर किया नमन*
खंडवा। शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में अपने ऐतिहासिक भाषण से भारतीय संस्कृति और वेदांत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने वाले स्वामी विवेकानंद जी का जीवन त्याग, ज्ञान और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक था। स्वामी जी का मानना था कि खुद पर विश्वास किए बिना ईश्वर पर विश्वास नहीं किया जा सकता। वे युवाओं को अपनी अंतर्निहित शक्तियों को पहचानने का संदेश देते थे। उनका सबसे प्रसिद्ध मंत्र “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए” – आज भी छात्रों और युवाओं का सबसे बड़ा मार्गदर्शक है। “दरिद्र नारायण” की सेवा ही ईश्वर की सच्ची पूजा है। उन्होंने 1897 में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, जो आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय है। युवाओं के प्रेरणास्रोत, राष्ट्र ऋषि, महान आध्यात्मिक गुरु और आधुनिक राष्ट्रवाद के जनक स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि पर सदभावना मंच उन्हें नमन करता है। यह उदबोधन स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि पर मंच कार्यालय में मंच संस्थापक प्रमोद जैन ने दिये। यह जानकारी देते हुए मंच के निर्मल मंगवानी ने कहा कि मध्य प्रदेश के खंडवा से उनका गहरा ऐतिहासिक संबंध रहा है। जून 1892 में एक संन्यासी के रूप में भ्रमण करते हुए स्वामी जी खंडवा आए थे। यही पर उन्होंने पहली बार शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में भाग लेने की अपनी इच्छा व्यक्त की थी। स्वामी के जीवन के आदर्श और उनकी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं। उनके विचारों को आत्मसात कर ही एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण किया जा सकता है। इस मौके पर मंच संस्थापक प्रमोद जैन, पीसी इंग्ले, श्वेता हरि सखी, सुरेंद्र गीते, प्रशांत अंकिल, गणेश भावसार, डॉ जगदीशचंद्र चौरे, केबी मंसारे, अनूप शर्मा, मनोज जोशी, योगेश गुजराती, एनके दवे, राधेश्याम शाक्य,अशोक जैन,अर्जुन बुंदेला, निर्मल मंगवानी, रामदुलारे शर्मा, कमल नागपाल, राजेश पोरपंथ, सुभाष मीणा और कैलाश पटेल आदि व्दारा श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए नमन किया।










